["अभिव्यक्तियाँ बोलती हैं" प्रेम-प्यार,सौहार्द का,सुखमय हो संचार।अलगावों में हो कमी,वृद्धि करे प्रेम-व्यापार ॥
देशहित पर हम,करें न भितरघात।अरमानों की नींव पर,कभी न हो आघात॥
सत्य-कर्म की साख से,रखें सदा अनुबंध।स्वार्थ-बुराई से परे,करें सभी अनुबंध॥
स्वार्थ की अग्नि से,जल न सके सुविचार।सत्य के नव आलोक से,सुखमय हो संसार॥
अनेक शुभकामनाओं
और
शुभभावनाओं सहित,]